बलरामपुर, मार्च 2 -- गैड़ास बुजुर्ग, संवाददाता। पवित्र माहे रमजान का पहला अशरा संपन्न होने के बाद अब दूसरा अशरा शुरू हो चुका है। इसे मगफिरत यानी क्षमा का अशरा कहा जाता है। क्षेत्र के इस्लामी विद्वान मौलाना मोहम्मद आलम रज़ा ने रमजान की फजीलत बयान करते हुए बताया कि दूसरा अशरा 10 रमजान की मगरिब की अजान के बाद से शुरू होकर 20 रमजान की मगरिब तक रहता है। मौलाना मोहम्मद आलम रजा ने कहा कि रमजान का महीना अल्लाह की खास रहमतों और बरकतों का महीना है, जिसमें इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। पहले अशरे में बंदों पर रहमत की बारिश होती है, जबकि दूसरे अशरे में गुनाहों की मगफिरत का दरवाजा खुला रहता है। इस दौरान बंदों को चाहिए कि वे सच्चे दिल से तौबा करें, ज्यादा से ज्यादा इबादत करें और अपने रब से अपने गुनाहों की माफी मांगें। मौलाना ने बताया कि जो शख...
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