सोनभद्र, दिसम्बर 1 -- सोनभद्र, संवाददाता। गीता जयंती समारोह समिति की तरफ से सोमवार को गीता जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। मानव जीवन में धर्मशास्त्र गीता की उपयोगिता विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि गीता जीविका-संग्राम का साधन नहीं अपितु जीवन संग्राम में शाश्वत विजय का क्रियात्मक प्रशिक्षण है। इसलिए यह युद्ध ग्रंथ है और यह युद्ध कहीं बाहर नहीं होता। यह युद्ध आंतरिक है। यह दैवी और आसुरी संपद, सजातीय एवं विजातीय, सद्गुण एवं दुर्गुणों का संघर्ष कहा गया है, जिसका परिणाम शाश्वत- सनातन परब्रह्म की प्राप्ति है। वक्ताओं ने कहा कि गीतोक्त पथ पर चलने के पूर्व मनुष्य सांसारिक उपलब्धियों, सुख-समृद्धि को ही महत्वपूर्ण समझता है। पूरा जीवन इन्हीं के लिए खपा देता है। वह कितना भी धन-संपदा अर्जित कर ले, कितने भी बड़े ओहदे पर हो जाये, वह कि...
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