महाराजगंज, मई 6 -- महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। काशी हिन्दू विवि वाराणसी के हिन्दी विभागाध्यक्ष व गीतकार प्रो. वशिष्ठ अनूप ने कहा कि आज की हिन्दी कविता अपने समय के गहन यथार्थ संघर्ष और चुनौतियों को मुखरता से अभिव्यक्त कर रही है। हिन्दी कविता रूमानी दुनिया से निकलकर महानगरों की यांत्रिकता के पलायन और बाजारवाद के बीच मानवीय संवेदनाओं को बचाने की जद्दोजहद कर रही है। कविता, गीत और गजल वर्तमान समय में एक विमर्श खड़ा कर रहा है। वे ग्राम स्वराज पुस्तकालय रामपुर बुजुर्ग में आयोजित आज की हिंदी कविता: यथार्थ और चुनौतियां विषयक व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि आर्थिक विषमता और पलायन कविताओं में निम्न में मध्यवर्ग की आर्थिक पीड़ा प्रमुखता से उभर रही है। कहा कि बाजार तमाम सारे माध्यमों से भरा पड़ा है। मजदूर पर कम लिखा जा रहा है। जो लिखा जा...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.