नई दिल्ली, जनवरी 29 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। देश की अर्थव्यवस्था में गिग वर्कर और उनसे जुड़े काम के हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन गिग वर्कर (कामगारों) की आमदनी सीमित है जो चिंताजनक है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि भारत में करीब 40 फीसदी गिग वर्कर्स की मासिक कमाई 15,000 रुपये से भी कम है, जिसे देखते हुए गिग क्षेत्र में बड़े नीतिगत सुधारों की सिफारिश की गई है। समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम प्रति घंटा या प्रति काम भुगतान तय किया जाना चाहिए। इसमें इंतजार के समय का पैसा भी शामिल होना चाहिए, जिससे कि उन्हें उचित मजदूरी मिल सके और रेगुलर नौकरी और गिग काम के बीच का फर्क कम हो सके। गिग अर्थव्यवस्था की नीति का मकसद लोग मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी पसंद का काम चुनाव होना चाहिए। अभी तक काफी लोग ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.