गंगापार, सितम्बर 27 -- श्राद्ध पक्ष शुरू होते ही घर-घर में पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोजन के लिए कौआ का इंतजार शुरू हो जाता है। मान्यता है कि कौए के भोजन ग्रहण करने को पितरों तक अर्पण पहुंचने का प्रतीक माना जाता है। लेकिन बदलते माहौल में कभी आसानी से दिखाई देने वाला कौआ अब कई इलाकों में कम नजर आने लगे हैं। कभी सुबह की पहली किरण के साथ घर के छतों और आंगनों में कौए की कांव-कांव आवाज सुनाई देती थी। श्राद्ध के दिनों में लोग घर की छत पर भोजन की थाली रखकर कौए के आने का इंतजार करते थे। किन्तु अब स्थिति यह है कि कई परिवारों को घंटों इंतजार के बाद भी कौआ दिखाई नहीं देता है। बुजुर्गों के लिए यह बदलाव केवल पक्षी के कम होने की कहानी नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली की याद भी दिलाता है। एक दिलचस्प घटना यह भी सामने आती है कि कई परिवार श्राद्ध का भोजन छत...