वाराणसी, मार्च 16 -- वाराणसी,मुख्य संवाददाता। गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी के साथ काशी के कलाकारों ने बनारस घराने के सिद्धहस्त कलाकारों को नमन किया। संगीत परिषद की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय सांगीतिक अनुष्ठान के अंतिम दिन रविवार को सुर और साज के साथ समर्पण का भाव भी प्रकट हुआ। इस संध्या में सबसे पहले पं.गणेश प्रसाद मिश्र ने बनारस घराने की सुप्रसिद्ध बंदिशों के गायन से की। उन्होंने राग मिश्र खमाज में ठुमरी 'हटो जाओ रे ना बोले कान्हा' के बाद दादरा 'डगर बीच कैसे चलूं' सुनाईं। राग मिश्र पीलू में 'मृग नयनी' और अंत में पं.महादेव प्रसाद मिश्र के होली की बंदिश 'काशी में होली रचावें रे भोला' से समापन किया। उनके साथ तबला पर पं. ललित कुमार, सारंगी पर अनीश मिश्रा, बांसुरी पर शनीश ज्ञावली ने संगत की।
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