गोड्डा, अगस्त 8 -- गोड्डा, एक प्रतिनिधि। मिथिला संस्कृति के प्रमुख मधुश्रावणी व्रत को लेकर विभिन्न गांवों में धूम मची हुई है।

व्रत का महत्व 14 दिवसीय अनुष्ठान के छठे दिन नवविवाहिता व्रती श्रद्धा और भक्ति के साथ गज पर विराजमान माता गौरी सहित बाबा महादेव, नाग नागिन आदि के पूजन में लीन हैं। मधुश्रावणी व्रत में फूलों का बहुत ही महत्व है। इस पर्व में विवाहित एक-एक फूल को चुन-चुनकर माला बनाती हैं और देवी-देवताओं को अर्पित करती हैं। ससुराल में मधुश्रावणी पूजा करती शिवाक्षी सुमन उर्फ सानिया सीमा झा, ससुर नरेंद्र झा का हर स्तर से सहयोग हो रहा है। बताती हैं कि पूजन के दौरान गज-गौरी सहित सभी देवी-देवताओं का अभिषेक करने व फूलों से ढ़ंकने का विधान है।

फूलों की व्यवस्था इसलिए इसमें कमल , गुलाब, अढ़होल, गुलदावदी, कनेल, तगड्ड आदि फूल व बेलपत्र शामिल कर...