गांवों में फिर जलने लगे चूल्हे, लकड़ी-कंडे बने सहारा
शाहजहांपुर, अप्रैल 6 -- घरेलू गैस की किल्लत के चलते ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर चूल्हों पर खाना पकाने का दौर लौट आया है। गैस सिलेंडर समय पर न मिलने और आपूर्ति प्रभावित होने से लोग मजबूरी में पुराने तरीकों की ओर लौट रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सिलेंडर खत्म होने के बाद नया गैस सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है। ऐसे में घरों में लकड़ी और कंडों का सहारा लिया जा रहा है। कई परिवारों ने तालाब की मिट्टी से फिर से चूल्हे तैयार कर लिए हैं और उसी पर खाना बनाया जा रहा है। कुछ घरों में गैस सिलेंडर उपलब्ध भी है, लेकिन आगे की दिक्कत को देखते हुए उसका सीमित उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार हालात ऐसे हैं कि अब उन्हें परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना पड़ रहा है।
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