गढ़वा, अप्रैल 13 -- रंका, प्रतिनिधि। जिलांतर्गत अधिसंख्य वनों में जड़ी-बूटियों का विशाल खजाना छिपा है। उक्त जड़ी-बूटी स्थानीय ग्रामीणों के लिए आजीविका का प्रमुख स्रोत और स्वास्थ्य के लिए औषधीय भंडार का काम करता है। स्थानीय वनों में सतावर, आंवला, फूलधवई, हर्रे, बहेड़ा, रंगैनी, गुड़मार, बेलगुड़ी, नागर मोथा, अइठा, कुरसा और वन तुलसी जैसी कई दुर्लभ जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं। उनमें रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है। स्थानीय ग्रामीण इन जड़ी-बूटियों को एकत्रित कर स्थानीय बाजारों में बेचते हैं। उन्हें यहां से दिल्ली, कोलकाता और कानपुर जैसे बड़े बाजारों में डेढ़ से दोगुना मुनाफा लेकर बेचा जाता है। गांवों में काम नहीं है। वन क्षेत्रों में मिलने वाले जड़ी बूटी ही आमदनी का साधन है। उससे रोजमर्रा की जरूरत पूरी होती है। प्रखंड के अधिसंख्य पं...
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