गर्मियों में पीते हैं गन्ने का जूस, जान लें इन गन्नों की मिठास बढ़ाने में था एक महिला का योगदान
नई दिल्ली, मार्च 18 -- शुगर को भले ही कई बीमारियों का कारण बताया जा रहा हो। लेकिन चीनी बनाने के लिए जरूरी गन्ने के प्रोडक्शन में भारत दुनियाभर में दूसरे नंबर पर है। और एक समय चीनी के प्रोडक्शन के लिए भारत को दूसरे देश के गन्नों पर निर्भर रहना पड़ता था और तब, बोटेनिस्ट जानकी अम्मल ने रिसर्च के बाद भारत की मिट्टी में उगने वाले गन्नों की मिठास को बढ़ाया था। लेकिन ये काम उतना आसान नहीं था। उस दौर में जब लड़कियों की शादी कम उम्र में कर दी जाती थी। जानकी अम्मल ने पढ़ाई की राह चुनी और पीएचडी के लिए वो विदेश तक गईं। अब अगर आप चीनी को सेहत का दुश्मन मानती हैं तो जरा चीनी बनाने वाले गन्ने के प्रोडक्शन से जुड़ी कहानी को जरूर जान लेंगन्ने की मिठास बढ़ाने में महिला बोटेनिस्ट का योगदान 1912 में जब भारत में गन्ने की फसल बोई जाती थी तो उनमे मिठास कम होती...
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