विधि संवाददाता, मार्च 21 -- Lucknow News: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि गर्भ में पल रहे, पांच माह से अधिक उम्र के शिशु को भी कानून की नजर में 'व्यक्ति' माना जाएगा तथा उसकी मौत पर अलग से मुआवजा दिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि गर्भस्थ शिशु की मृत्यु को एक स्वतंत्र जीवन की हानि के रूप में देखा जाएगा। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की एकल पीठ ने यह निर्णय सुखनंदन की ओर से दाखिल प्रथम अपील पर सुनवाई के उपरांत पारित किया। अपील रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल, लखनऊ के 18 फरवरी 2025 के आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी। दरअसल, 2 सितंबर 2018 को भानमती नामक महिला बाराबंकी स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय गिर गई थी। गंभीर घायल होने पर अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उस समय वह 8-9 माह के गर्भ से थी, दुर्घटना में गर्भस्थ शिशु की भ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.