किशनगंज, जुलाई 19 -- किशनगंज। निज संवाददाता सुरक्षित मातृत्व केवल प्रसव तक सीमित लक्ष्य नहीं, बल्कि स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु के निर्माण की आधारशिला है। गर्भावस्था के दौरान जहां पोषण, नियमित जांच और चिकित्सकीय देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाता है, वहीं मानसिक स्वास्थ्य अक्सर चर्चा के दायरे से बाहर रह जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती महिला का मानसिक तनाव न केवल उसके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि गर्भस्थ शिशु के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर भी गहरा असर डाल सकता है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-3) के अनुरूप सुरक्षित मातृत्व और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ टेली-मानस जैसी नि:शुल्क परामर्श सेवाओं को लोगों तक पहुंचा रहा है, ता...