गर्भावस्था में प्रीक्लेम्पसिया से बचाव की ढाल बनी एस्पिरिन
नई दिल्ली, मई 22 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। गर्भावस्था के दौरान कई महिलाएं प्रीक्लेम्पसिया की समस्या से दो-चार होती हैं। इसके लक्षण बेहद सामान्य हैं। इसमें पांव में सूजन आ जाती है। जिसे महिलाएं आमतौर पर नजरअंदाज कर देती हैं। मामूली लगने वाली यही समस्या आगे बड़ी परेशानी बन सकती है। ऐसे में यदि गर्भावस्था के 13-14 सप्ताह में स्क्रीनिंग के दौरान बीमारी का पता चल जाए तो एस्पिरिन की गोली इससे निपटने में काफी कारगर है। इसके इस्तेमाल से 90 प्रतिशत महिलाओं को प्रीक्लेम्पसिया से बचाया जा सकता है। दिल्ली एम्स में गायनी की विभागाध्यक्ष डॉ. नीना मल्होत्रा के मुताबिक, देश में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर करीब 90 है। श्रीलंका और भूटान जैसे देशों में मातृ मृत्यु दर यहां के मुकाबले करीब तीन गुना कम है। गर्भावस्था में हेमरेज और संक्रमण के बाद प्रीक...
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