कानपुर, अगस्त 8 -- कानपुर, प्रमुख संवाददाता एनीमिया की समस्या कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गर्भवती महिलाओं में 65 फीसदी और किशोरियों में 53 फीसदी तक एनीमिया पाया जा रहा है। गंभीर एनीमिया की स्थिति में मरीज को कब और किस तरह का रक्त चढ़ाना है, इसमें थोड़ी सी चूक भी भारी पड़ सकती है। इसी को लेकर शनिवार को आईएसओपीएआरबी सोसाइटी की ओर से एनीमिया एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन विषय पर वैज्ञानिक गोष्ठी हुई।सोसाइटी अध्यक्ष डॉ. नीलम मिश्रा ने गर्भावस्था, सामान्य प्रसव और शल्य प्रसव के दौरान जरूरत के अनुसार रक्त के सही रूप के चयन की जानकारी दी। पहले सत्र में डॉ. मनीषा अग्रवाल ने एनीमिया और गंभीर एनीमिया की पहचान, जांच व उपचार पर जानकारी दी। दूसरे सत्र में डॉ. प्रियंका वर्मा ने सुरक्षित रक्ताधान की प्रक्रिया और सावधानियों पर प्रकाश ड...