सिद्धार्थ, अप्रैल 26 -- सिद्धार्थनगर, निज संवाददाता। जनपद में गर्भवती की स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। गर्भवती के साथ-साथ परिजन भी खान-पान पर विशेष ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही कारण है कि हर सातवी पीड़िता हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की समस्या झेल रही है। मार्च माह में विभाग की ओर से गर्भवती के स्वास्थ्य परीक्षण के जारी आंकड़े बेचैन करने वाले हैं। 3850 गर्भवती की स्वास्थ्य परीक्षण में 489 गर्भवती खून की कमी से ग्रसित मिली हैं। इसमें 98 गर्भवती को आयरन सुक्रोच चढ़ाना पड़ा है। ऐसे में सामान्य प्रसव की कल्पना करना बेमानी साबित होता दिख रहा है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) कार्यक्रम चलाता है। इस कार्यक्रम के तहत गर्भवती का परीक्षण कर सुरक्षित प्रसव कराने की योजना बनाई जाती है। इसके लिए माह की एक, आठ, 16...