नई दिल्ली, अप्रैल 30 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि किसी नाबालिग लड़की को गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कि 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट' में संशोधन करने को कहा है ताकि दुष्कर्म पीड़िता 20 हफ्ते के बाद भी अपनी अनचाही गर्भावस्था को कानूनी रूप से खत्म कर सके। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओर से दाखिल सुधारात्मक (क्यूरेटिव) याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। यह भी पढ़ें- इस उम्र में उसे पढ़ाई करनी चाहिए, लेकिन हम उसे मां बनाना चाहते हैं; AIIMS की याचिका पर भड़का सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ एम्स की ओर से दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्...
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