नई दिल्ली, अप्रैल 25 -- हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद की रस्में सिर्फ सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि मृतक की आत्मा की शांति और उसके परलोक यात्रा को आसान बनाने का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक उपाय हैं। गरुड़ पुराण (जो मृत्यु और उसके बाद की यात्रा का विस्तृत वर्णन करता है) में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा को नया सूक्ष्म शरीर बनाने और यमलोक तक की कठिन यात्रा तय करने के लिए पिंडदान और तेरहवीं भोज बहुत जरूर हैं।मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के तुरंत बाद यमदूत आत्मा को यमलोक ले जाते हैं, जहां उसे जीवन के कर्मों का हिसाब दिखाया जाता है। लगभग 24 घंटे यमलोक में रहने के बाद आत्मा को उसके परिवार के बीच छोड़ दिया जाता है। इस दौरान आत्मा में इतनी शक्ति नहीं होती कि वह सीधे यमलोक की यात्रा कर सके। इसलिए वह अपने ...