अलीगढ़, जुलाई 7 -- इगलास, संवाददाता। तहसील क्षेत्र के कस्बा बेसवां, तोछीगढ़, जवार गावों में ताजिये के जुलूस निकाले गए। यह दिन मुस्लिम भाइयों द्वारा इमाम हुसैन की शहादत को लेकर मनाया जाता है। इस्लाम में मुहर्रम मनाने का रिवाज इमाम हुसैन इब्न अली की शहादत को याद करना है। मुस्लिम समाज के लोग मुहर्रम को एक पवित्र महीना मानते हैं। इमाम हुसैन ने याज़िद के अन्याय पूर्ण शासन और उसकी बेइंसाफियों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी। उन्होंने अत्याचार के आगे झुकने से इनकार कर दिया। सच्चाई, न्याय और इस्लाम के सिद्धांतों को बचाने के लिए अपने परिवार और साथियों के साथ अपनी जान कुर्बान कर दी। तभी से शिया मुसलमान मुख्य रूप से इस दिन को शोक ओर मातम के रूप में मनाते हैं। इमाम हुसैन और उनके साथियों की भूख प्यास व शहादत को याद करते हुए जुलूस निकालते हैं। बेसवां में घंटाघर ...
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