पल्लवी सिंघल, नवम्बर 4 -- एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल पर रोक लगाने के बाद केंद्र सरकार ने अब चावल के इस्तेमाल पर भी सीमा तय कर दी है। सरकार के इस फैसले से एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों की निर्भरता मक्के पर बढ़ सकती है। उद्योग जगत के अनुमान के मुताबिक, 2026-27 में एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के की मांग करीब 1.6 करोड़ टन तक पहुंच सकती है, जबकि चालू आपूर्ति वर्ष में यह लगभग 1.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है। सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अतिरिक्त चावल और खराब खाद्यान्न से एथेनॉल बनाने की मात्रा सीमित कर दी है। तीन नवंबर को जारी संशोधित टेंडर की शर्तों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती तीन तिमाहियों में एफसीआई के अतिरिक्त चावल से अधिकतम 324 करोड़ लीटर एथेनॉल बनाया जा सकेगा। वहीं, खराब खाद्यान्न से एथेनॉल उत्पादन की सालाना ...