प्रयागराज, मई 1 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि गंभीर और जघन्य अपराधों में आपसी समझौता न्याय प्रक्रिया को रोकने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि जघन्य अपराधों को अंजाम देने के बाद निजी तौर पर समझौता करके न्याय के रास्ते में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक न्याय प्रणाली कोई निजी कार्य नहीं है। यह भी पढ़ें- गंभीर अपराधों में निजी समझौता कर नहीं बच सकते, हत्या के प्रयास की FIR रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकारमहत्वपूर्ण आदेश यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मेरठ के खरखौदा थाने में दर्ज एफआईआर को लेकर दाखिल मनोज व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि जानलेवा हथियारों के साथ हुए दोतरफा हमले में दोन...
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