प्रयागराज, अप्रैल 30 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि गंभीर और जघन्य अपराधों में आपसी समझौता न्याय प्रक्रिया को रोकने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि जघन्य अपराधों को अंजाम देने के बाद निजी तौर पर समझौता करके न्याय के रास्ते में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक न्याय प्रणाली कोई निजी कार्य नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मेरठ के खरखौदा थाने में दर्ज एफआईआर को लेकर दाखिल मनोज व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि जानलेवा हथियारों के साथ हुए दोतरफा हमले में दोनों पक्षों को गंभीर छोटे आईं, ऐसे मामलों में समझौते को आम बात मान लिया जाए तो पब्लिक जस्टिस सिस्टम खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि क...