लखनऊ, अप्रैल 30 -- गंगा एक्सप्रेसवे पर 594 किलोमीटर लंबे सफर को आरामदेह व सुरक्षित बनाने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर मौसूम अनुकूल डामर परत (डीबीएम) को 100 मिलीमीटर तक की मोटाई दी गई है। यह तकनीक सड़क को भीषण गर्मी और अत्यधिक बारिश के प्रभाव से सुरक्षित रखती है। इसके लिए 3.67.022 मीट्रिक टन डामर का इस्तेमाल किया गया। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे को मजबूती देने के लिए मिट्टी की मजबूती का पैमाना अपनाया गया है। कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो (सीबीआर) का प्रयोग किया गया है, जिसकी वैल्यू आठ पर रखी गई है, जो एक अत्यंत स्थिर और ठोस आधार का प्रमाण है। यह भी पढ़ें- गंगा एक्सप्रेसवे: मेरठ से प्रयागराज तक तरक्की की नई रफ्तार, बदल जाएगी पश्चिमी यूपी की सूरत एक्सप्रेसवे पर 19 करोड़ घन मीटर मिट्टी, 2,78,380 मिट्रि...
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