मेरठ, अप्रैल 30 -- प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में एक नए स्वर्णिम अध्याय की अब शुरुआत होने जा रही है। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के साथ ही प्रदेश के दो छोर पूरब और पश्चिम एक-दूसरे के इतने करीब आ जाएंगे कि फासला अब समय की बाधा नहीं रहेगा। अब वह दिन दूर नहीं जब श्रद्धालु और यात्री सुबह की शुरुआत संगम की पवित्र लहरों में करेंगे और सूर्यास्त तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक केंद्र क्रांतिधरा मेरठ में शीश नवा सकेंगे। निश्चित तौर से मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे से संगम नगरी से बाबा औघड़नाथ की धरती तक आस्था का सफर आसान हो जाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे का सपना साकार होने के साथ ही अब 'सुबह प्रयागराज, शाम मेरठ' का सपना हकीकत में बदलने वाला है。 यह भी पढ़ें- मेरठ : प्रतापगढ़ का आंवला और हरदोई की मिर्च का मेरठ, दिल्ली तक पहुंचेगा स्वादश्रद्धालुओं क...
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