नई दिल्ली, अगस्त 8 -- -10 साल पहले नीरज ने विश्व रिकॉर्ड के साथ जीता था स्वर्ण पदक, उन्हीं को देख आशीष ने थामा था भाला यह भी पढ़ें- जैवलिन थ्रो में नालंदा की पल्लवी ने जीता पदकआशीष का संघर्ष -16 साल की उम्र तक पिता के साथ गाय-भैसों का दूध निकालने और बेचने का काम करते थे आशीष यह भी पढ़ें- Bhagalpur News: पूर्णिया : जिला स्तरीय जैवलिन प्रतियोगिता में 85 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा राजीव शर्मा, नई दिल्ली। आशीष यादव 15-16 साल तक पिता के साथ गाय-भैसों का दूध निकालने और बेचने के साथ ही खेतों में काम करते थे। समय निकालकर शौकिया तौर पर लकड़ी के भाले से थ्रो करते थे। उनके इस शौक को नीरज चोपड़ा के पेरिस ओलंपिक में रजत ने जुनून में बदल दिया। उसने ठान लिया कि अब वह दूध नहीं निकालेगा। अपनी अलग पहचान बनाएगा。इतिहास में नाम दर्ज आशीष की यह मेहनत रंग लाई। उ...