लखनऊ, अप्रैल 19 -- खाड़ी युद्ध से रसायनिक उर्वरकों की संभावित संकट को देखते हुए प्रदेश का कृषि विभाग जैविक व हरी खाद के प्रयोग बढ़ाने पर ध्यान देगा। विभाग का मानना है कि इससे जहां रसायनों का प्रयोग कम हो सकेगा, वहीं जैविक व हरी खाद के प्रयोग से खेतों की सेहत भी सुधरेगी और लागत भी कम होगा।कृषि निदेशक डा. पंकज त्रिपाठी ने प्रदेश के किसानों से मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हरी खाद के प्रयोग को बढ़ाने का सुझाव दिया है। किसान फसलों से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करें। यह भी पढ़ें- उर्वरकों का संतुलित उपयोग हेतु पंचायत स्तरीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित वर्तमान में प्रदेश की मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा मात्र 0.2 से 0.3 प्रतिशत रह गई है, जिसे बढ़ाकर 0.8 से 1...