गोरखपुर, दिसम्बर 5 -- गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। गोरखपुर और बस्ती मंडल में धान की फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष जलाने का क्रम जारी है। कृषि वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों की ताज़ा रिपोर्ट बताती हैं कि यह त्वरित समाधान मिट्टी के लिए दीर्घकालिक बीमारी बनता जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) और अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता, जैविक गतिविधि और संरचना पर गहरा असर पड़ता है। पराली जलाने से निकलने वाले धुएं में पीएम 2.5 कणों की मात्रा बहुत अधिक होती है। शोध बताते हैं कि यह प्रदूषण उत्तर भारत की हवा को 25-30 फीसदी तक प्रभावित करता है। इसके अलावा कार्बन मोनो आक्साइड₂, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसें जलवायु परिवर्तन को तेज करती हैं। संयुक्त कृषि निदेशक डॉ अरवि...
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