मुंगेर, अप्रैल 18 -- मुंगेर, निज प्रतिनिधि। हरित क्रांति के बाद खेती के साधन तो जरूर बढ़े हैं। ट्रैक्टर, पंपसेट, थ्रेशर, हार्वेस्टर, हाईब्रिड बीज, कीटनाशक और उन्नत खाद सब कुछ किसान के पास पहुंचा। लेकिन हकीकत यह है कि पहले की तुलना में खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है और जोखिम भी। सिंचाई, बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और भंडारण पर भारी खर्च के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसानों से बातचीत में सामने आया कि एक एकड़ धान की खेती पर अब 25 से 30 हजार रुपये तक खर्च आ जाता है। डीजल महंगा होने से सिंचाई की लागत बढ़ी है। यह भी पढ़ें- हर साल 10 फीसद बढ़ जाती है लागत पर उस अनुपात में कीमत नहीं मिलती अच्छी क्वालिटी का बीज, डीएपी-यूरिया और कीटनाशक भी महंगे हुए हैं। कटाई और मड़ाई में मजदूरी बढ़ी है। भंडारण की सुविधा न होने से त...
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