नई दिल्ली, मार्च 2 -- ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने कांग्रेस के स्टाफ को बंद कमरे में दी गई जानकारी में स्वीकार किया कि ऐसा कोई खुफिया संकेत नहीं था, जिससे यह साबित हो कि ईरान पहले अमेरिका पर हमला करने जा रहा था। मामले से जुड़े दो सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान पर दशकों का सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई मारे गए, कई युद्धपोत डुबो दिए गए और अब तक 1,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हमलों से पहले कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कार्रवाई इसलिए मंजूर की क्योंकि संकेत थे कि ईरान मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी बलों पर पहले हमला कर सकता है...