नवादा, फरवरी 10 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। एक समय था जब खुरी नदी की कलकल करती धारा नवादा की पहचान हुआ करती थी। खेतों की प्यास बुझाना हो या शहर की प्यास, यह नदी किसी वरदान से कम नहीं थी। लेकिन आज वही खुरी नदी सरकारी उपेक्षा, बढ़ते अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है। नदी का सीना अब पानी से नहीं, बल्कि शहर के कचरे और पहाड़ों से बहकर आई मिट्टी यानी गाद से भर कर रह गया है। नवादा शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाली यह नदी अब धीरे-धीरे जमीन के समतल होती जा रही है। बारिश के मौसम में पहाड़ी इलाकों से आने वाली मिट्टी नदी की गहराई को खत्म कर रही है। आलम यह है कि नदी और किनारे की जमीन के बीच का अंतर मिटता जा रहा है। यदि जल्द ही इसकी उड़ाही सफाई नहीं की गई, तो भविष्य में सामान्य बारिश भी शहर के लिए बड़े जलप्रलय का कारण बन सकती ह...