नई दिल्ली, सितम्बर 9 -- हर वर्ष 10 सितंबर को 'विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस' मनाया जाता है। हालांकि, सिर्फ एक दिन इसे मनाने से समाज में आत्महत्या नहीं रुक सकती। बड़े-बुजुर्ग ही नहीं, छात्र और युवा भी अपनी जान लेते रहे हैं। आखिर क्यों? आत्महत्या यानी खुद को मारना, निहायत ही कठिन कार्य है। क्या खुदकुशी करने से उनकी समस्याएं सुलझ जाती हैं? यकीनन नहीं। ऐसे में, समाज को आगे आना होगा। अगर हमारा समाज वाकई आत्महत्या जैसी चीज को खत्म करना चाहता है, तो उसे सबसे पहले सभी में जुड़ाव बढ़ाना होगा। हमें आपस में जुड़ना चाहिए। यह जुड़ाव ऐसा हो कि किसी को अकेलेपन जैसा महसूस न हो। मृत्यु तो अटल सत्य है, लेकिन इसके पहले जो खूबसूरत जिंदगी और सुंदर दुनिया को देखने और महसूस करने का मौका मिला है, उसको खुदकुशी करके खत्म तो नहीं करना चाहिए। समाज में लोग बाहरी मुखौटा...