मोतिहारी, अप्रैल 11 -- ध्र्रुव नारायण सिंह, मोतिहारी। हाड़तोड़ मेहनत और अधिक पूंजी लगाने के बाद भी धान की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। लागत अधिक व मुनाफा कम होने से किसानों का दम निकाल रहा है। बीज व महंगी सिंचाई से किसानों के पसीने छूट रहे हैं। खेती में बढ़ती मजदूरी से किसानों काे धान की खेती से मोहभंग होने लगा है। जलवायु परिवर्तन के दौर में धान की खेती में बेशुमार समस्याएं है। यह सूरत ए हाल पूर्वी चंपारण में धान उत्पादन करने वाले किसानों की है। जो चाह कर भी न तो खेती छोड़ पा रहे हैं और न धान की खेती कर अधिक मुनाफा ही ले पा रहे हैं। बाढ़ - सुखाड़ की मार से धान उत्पादन पर असर : किसान अधिक उत्पादन की लालच में महंगे बीज खरीद कर सबसे पहले धान के बिचड़े उगाते हैं। बारिश नहीं होने पर बिचड़े पर जब सूखे का कहर होने लगता है तो सिंचाई कर बिचड...
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