मेरठ, जून 19 -- मेरठ। आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य जीवन के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। यदि इन तीनों में संतुलन रहे तो व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ और ऊर्जावान रह सकता है। प्राणायाम से शरीर में हल्कापन, मन में प्रसन्नता एवं विचारों में स्पष्टता आती है। योग-प्राणायाम का नियमित अभ्यास कई शारीरिक-मानसिक विकारों से बचाव में सहायक है। आज अधिकांश रोग असंतुलित खानपान, तनाव, शारीरिक श्रम की कमी और कृत्रिम जीवनशैली से हो रहे हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और तनाव इसका परिणाम है। प्राकृतिक एवं सात्विक जीवनशैली अपनाने से ही निरोगी रह सकते हैं। सीसीएसयू कैंपस में क्रीड़ा भारती के साथ जारी योग शिविर में गुरुवार को यह बात योग गुरु स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने कही। योगाभ्यास कराते हुए स्वामी कर्मवीर ने कहा कि मनुष्य का वर्तमान और भविष्य उसके संस्कार, विचार और आच...