नई दिल्ली, मार्च 30 -- सटीक सुरक्षा रणनीति, अत्याधुनिक तकनीक आधारित सफल ऑपरेशन और कोर नक्सल गढ़ में सुरक्षा बलों के कैंप बनाकर विकास की पहुंच सुनिश्चित करके तिरुपति से पशुपति तक फैले तथाकथित "रेड कॉरिडोर" का सपना देखने वालों का युग लगभग समाप्त हो गया है। नक्सली संगठन के कोर कमांडर या तो मारे गए हैं या उन्होंने सरेंडर कर दिया। बचे हुए एकाध नक्सल नेता सरेंडर के लिए वार्ता कर रहे हैं। उन्हें भी सुरक्षा बल चंद दिनों में अपनी गिरफ्त में लेने का दावा कर रहे हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि लाल आतंक की कहानी अब खत्म हो चुकी है। लाल झंडे की जगह तिरंगे ने ले ली है। नक्स्ल प्रभावित गांवों में विकास की बयारजमीन पर काम कर रहे सुरक्षा बल के अधिकारियों का कहना है कि देश के बड़े भूभाग में जहां लाल आतंक का साया था। वहां सुरक्षा बलों के कैंप में और गांवों में अ...
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