वाराणसी, अप्रैल 8 -- वाराणसी। जमीनों की रजिस्ट्री के दौरान अब मूल खतौनी में खातेदार के तौर पर नाम दर्ज होना जरूरी है। पहली अप्रैल से यह शासनादेश लागू होने से बनारस के सातों उपनिबंधक कार्यालयों में सैकड़ों रजिस्ट्रियां फंस गई हैं। नए नियम के कारण रोज क्रेता और विक्रेता निराश लौट रहे हैं। वहीं, अधिवक्ता लाखों का स्टाम्प रजिस्ट्री की फाइल में लगाकर मायूस बैठे हैं। उधर, पिंडरा तहसील में नाराज अधिवक्ताओं ने मंगलवार को रजिस्ट्री कार्य सहित सभी न्यायालय से कार्य बहिष्कार कर दिया था। इसके पूर्व तहसील बार एसोसिएशन ने बैठक कर नए शासनादेश पर चर्चा की। अधिवक्ताओं ने बताया कि मूल खतौनी में नाम होने और अंश निर्धारण पर ही बैनामे का आदेश गलत है। उन्होंने बताया कि उसी के मुताबिक निबंधन विभाग के पोर्टल में सॉफ्टवेयर फीड किया गया है। वकीलों का कहना है कि तह...