रांची, मार्च 24 -- रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका के भूमि विवाद मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (खतियान) के अंतिम प्रकाशन के बाद समय सीमा बीत जाने पर दायर मुकदमा कानूनन मान्य नहीं है। अदालत ने कहा संताल परगना बंदोबस्त विनियमन, 1872 के प्रावधानों के अनुसार, खतियान के खिलाफ आपत्तियां उसके प्रकाशन के छह महीने के भीतर ही दर्ज की जा सकती हैं। उसके बाद, वह अंतिम रूप ले लेता है और उसे किसी नई बंदोबस्त प्रक्रिया या राज्य सरकार की स्पष्ट अनुमति के बिना चुनौती देना कानूनी तौर पर मान्य नहीं है। यह मामला दुमका जिले के बारा करेला और गजंदा गांवों में स्थित जमीन से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों ने न तो निर्धारित छह महीने क...
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