मिर्जापुर, मार्च 21 -- मिर्जापुर। नन्ही चिड़िया गौरैया आंगन की शोभा के साथ पर्यावरण की संतुलक, खेती में सहायक और भावनात्मक जीवन की धड़कन रही है। घर-आंगन की पहचान गौरैया का अस्तित्व लगातार खतरों से घिरता जा रहा है। वह विलुप्त हो गई तो हवा, हरियाली, खेती, जैव विविधता पर असर पड़ेगा। पक्षी प्रेमियों का कहना है कि अब भी संरक्षण की ठोस पहल नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियां गौरैया की चहचहाहट से वंचित रह जाएंगी। उनका सवाल है कि क्या विकास की दौड़ में हम इस नन्हीं चिड़िया के लिए कुछ जगह बचा पाएंगे? कभी सुबह की पहली आहट गौरैया की चहचहाहट से सुनाई देती थी। घर के आंगन, छप्पर, रोशनदान, खपरैल, पेड़ की डाल और अनाज के दानों के बीच फुदकती गौरैया जीवन का इतना सहज हिस्सा थी कि लोग उसके महत्व को अलग से समझने की जरूरत नहीं समझते थे। जीवन में एक अपनापन था। बच्चे उ...
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