सुल्तानपुर, फरवरी 28 -- करौंदीकला, संवाददाता। क्षेत्र में किसानों की जीवनरेखा माने जाने वाले राजकीय नलकूप इन दिनों स्वयं बदहाली के आंसू बहा रहे हैं। कभी हरे-भरे खेतों को जीवन देने वाले ये नलकूप अब तकनीकी खराबी, विद्युत आपूर्ति की अनियमितता और मरम्मत के अभाव में वर्षों से बंद पड़े हैं, जिससे क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। क्षेत्र के अधिकांश राजकीय नलकूप या तो खराब पड़े हैं अथवा शोपीस बनकर रह गए हैं। समय पर सिंचाई न हो पाने से गेहूं, सरसों और दलहनी फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसान मजबूरी में निजी नलकूपों से महंगी दरों पर सिंचाई कराने को विवश हैं, जिससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ती जा रही है और लाभांश घटता जा रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.