मेरठ, मार्च 2 -- हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 22वें दिन रविवार को सर्वप्रथम मंत्रोच्चारण पूर्वक भगवान आदिनाथ का अभिषेक तथा शांतिधारा कर मांगलिक क्रियाएं की गईं। रविवार को 86 परिवारों ने विधान में भाग लेकर पुण्य अर्जन किया। भक्तामर पाठ के मध्य मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि जिस पुण्य पुरुष के पास क्षमा रूपी चिंतामणी विद्यमान है ऐसा पुरुष देवेंद्रों के समूह द्वारा भी अर्चनीय होता है। तीन लोक की विभूति उसके चरणों में वास करने हेतु लालायित रहती है। क्षमा प्रदान करना कोई एहसास नहीं अपितु आत्मशुद्धि का एक साधन है। भगवान का स्वर्ण कलश से भगवान का अभिषेक नवीन जैन,, नीतेश जैन, शांतिधारा ऊषा जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलन तनु जैन,, जीवांशी जैन, मानसी जैन ने किया। सायंकाल में भगवान आदिनाथ की आ...