क्लिनिकल निर्णय लेने में विश्वसनीय शोध साक्ष्य जरूरी
गोरखपुर, अगस्त 21 -- गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता। एम्स में शुक्रवार को सिस्टमेटिक रिव्यू एवं मेटा-एनालिसिस 2.0 विषय पर दो दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला की शुरूआत हुई। इसमें रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स (आरसीटी) के साथ शोध और साक्ष्यों के विश्लेषण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका आयोजन टेक्निकल रिसोर्स सेंटर (टीआरसी), मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) और मेडिकल एजुकेशन यूनिट (एमईयू) के तत्वावधान में किया जा रहा है। उद्घाटन करते हुए एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता कहा कि क्लिनिकल निर्णय लेने में विश्वसनीय शोध साक्ष्य जरूरी हैं। वैज्ञानिक एवं पद्धतिगत कठोरता से तैयार साक्ष्य रोगी देखभाल और स्वास्थ्य नीतियों को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। यह भी पढ़ें- गंभीर मरीजों में इलाज का फैसला अब सिर्फ बीपी-पल्स से नहीं कार्यशा...
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