कानपुर, जनवरी 23 -- कानपुर देहात, संवाददाता। देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले शहीदों की गौरव गाथा को लोग भूलते जा रहे हैं। इतना ही नहीं आजादी की लड़ाई के प्रमुख केंद्र रहे शहादत व शौर्य के स्थल उपेक्षा का शिकार होकर अस्तित्व संकट से जूझ रहे हैं। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने वाले गुमनाम जांबाजों की शहादत का मूक गवाह ऐतिहासिक शुक्ल तालाब पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित होने के बाद भी इसको पीपी मॉडल पर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने का दो साल से इंतजार है। गदर की यादों को संजोए है यह ऐतिहासिक तालाब पुरातत्व् विभाग से संरक्षित अकबरपुर का ऐतिहासिक शुक्ल तालाब गदर के दौरान आजादी के सेनानियों की कुर्बानी का मूक गवाह है। सन 1857 की गदर में तात्या टोपे के साथ शाहपुर की रानी की अगुआई में रण बांकुरों ने ...
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