क्यों 18 अक्टूबर को अष्टमी का व्रत रखें?, क्यों अष्टमी और नवमी 19 अक्टूबर को एक साथ ना करें? ज्योतिर्विद ने सब बताया
नई दिल्ली, अक्टूबर 17 -- इस साल शारदीय नवरात्र में अष्टमी, नवमी और सप्तमी तिथि को लेकर कंफ्यूजन बहुत है। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि किस दिन व्रत रकें और किस दिन कन्या पूजन करें। इसको लेकर ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी ने सभी कंफ्यूजन को दूर किया है। ज्योतिर्विद ने बताया है कि सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर दिन शनिवार को प्रातः काल 8:58 बजे से पूर्व पूजा पंडालो में देवी प्रतिमाओं का स्थापना कर लिया जाएगा। शनिवार को सप्तमी का मान रहेगा और रविवार को सप्तमी तिथि पूर्व 5:53 तक रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी।क्यों रविवार को अष्टमी का व्रत रखा जाएगा? ज्योतिर्विद ने बताया कि नवरात्र में रात का महत्व होता है, जैसा कि नाम से समझ आ रहा है। नौ रात, इसलिए क्योंकि काशी के पंचांगों के अनुसार देखा जाए तो अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सूर्योदय पूर्व 5:53 बजे से ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.