कौशाम्बी, अप्रैल 13 -- स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टीईटी एक अनिवार्य मानक है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षक बनने के लिए बीएड या डीएलएड पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभ्यर्थी का टीईटी उत्तीर्ण होना कानूनी रूप से आवश्यक है। उच्चतम न्यायालय के कड़े रुख ने इसका महत्व बढ़ा दिया है। इस मामले में न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि टीईटी केवल नए अभ्यर्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि उन कार्यरत शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य है जिनकी नियुक्ति उचित योग्यता के बिना हुई थी। ऐसे शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर यह परीक्षा पास करनी होगी। कुल मिलाकर, टीईटी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कक्षा में खड़े शिक्षक के पास न केवल विषय का ज्ञान हो, बल्कि उनमे...