क्या है वृषोत्सर्ग श्राद्ध, पितरों की इससे होती है मुक्ति
नई दिल्ली, मई 18 -- यह अनुष्ठान पितरों के लिए किया जाता है। भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा कि महाराज ! कार्तिक या माघकी पूर्णिमा, चैत्रकी पूर्णिमा तथा तृतीया, वैशाखकी पूर्णिमा एवं द्वादशी में शुभ मुहूर्तों को देखकर पितरों के लिए वृषोत्सर्ग श्राद्ध किया जाता है। इसका उल्लेख आपको भविष्यपुराण में मिलता है। इसका अर्थ है किसी बैल को खरीदकर उसे दान करना , खुला छोड़ देना, ऐसा कहा जाता है कि इससे आपके पितरों को मुक्ति मिलती है। इसमें तीन वर्ष की आयु वाले एक सांड़ (वृषभ) का विशेष पूजन किया जाता है। इसके बाद गाय को भी दान किया जाता है। इसके बाद सांड़ को समाज सेवा के लिए स्वतंत्र विचरण हेतु छोड़ दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इनके साथ छोड़ने से अनन्त पुण्य प्राप्त होता है। वृषोत्सर्ग क्यों किया जाता है? वृषोत्सर्ग एक हिंदू धार्मिक कर्मकांड है, यह मुख्य ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.