क्या है यज्ञोपवीत या जनेऊ के तीन सूत्रों और नौ धागों का मतलब?
नई दिल्ली, अगस्त 25 -- यज्ञोपवीत के तीन लड़, सृष्टि के समस्त पहलुओं में व्याप्त त्रिविध धर्मों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं। तैत्तिरीय संहिता 6, 3, 10, 5 के अनुसार तीन लड़ों से तीन ऋणों का बोध होता है। ऋषिऋण, देवऋण और पितृऋण। आइए जानते हैं यज्ञोपवीत के नौ धागे और तीन लड़ किन बातों का प्रतीक हैं। यज्ञोपवीत के तीन सूत्रों में कौन से देवता वास करते हैं।यज्ञोपवीत के नौ धागे किस चीज का प्रतीक माने जाते हैं। इन चीजों से जुड़ी जानकारी आपको इस लेश में मिलेगी।यज्ञोपवीत के तीन सूत्रों में कितने देवता करते हैं वास सामवेदीय छांदोग्यसूत्र में लिखा है- ब्रह्मा ने तीन वेदों से तीन लड़ों का सूत्र बताया। विष्णु ने ज्ञान, कर्म, उपासना इन तीनों कांडों से तिगुना किया। शिव ने गायत्री से अभिमंत्रित कर उसमें ब्रह्म गांठ लगा दी। इस प्रकार यज्ञोपवीत नौ तार ...
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