नई दिल्ली, मई 27 -- सुप्रीम कोर्ट बुधवार को एक ऐसे मामले में अपना फैसला सुनाने जा रहा है, जिसे संविधान लागू होने के बाद से देश की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के ढांचे की सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक समीक्षा माना जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ इस पर अपना निर्णय देगी कि क्या चुनाव आयोग द्वारा बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में चलाया गया विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान कानूनी रूप से वैध था या नहीं। निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार से इस विशेष अभियान की शुरुआत की थी, जिसे बाद में पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्यों में विस्तार दिया गया। इसके तहत उन मतदाताओं से दस्तावेजी सबूत मांगे गए जिनका रिकॉर्ड 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा था। शुरू में 11 श्रेणियों के दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन...