शिमला, सितम्बर 21 -- बैंक से कर्ज लेते समय किसी व्यक्ति के लिए गारंटर बनना केवल औपचारिकता नहीं है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लोन डिफॉल्ट से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि गारंटर की देनदारी मुख्य कर्जदार के समान होती है। बैंक या ऋणदाता के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह गारंटर के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू करने से पहले मुख्य कर्जदार से वसूली के सभी उपाय अपना ले। बैंक यह तय कर सकता है कि उसे वसूली की कार्रवाई पहले मुख्य कर्जदार के खिलाफ करनी है या गारंटर के खिलाफ। न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा ने यह व्यवस्था गारंटरों की उस याचिका को खारिज करते हुए दी, जिसमें उन्होंने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी संपत्ति की बिक्री के लिए वारंट जारी किया गया था। मामला कांगड़ा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़ा है। बैंक ने वर्ष 2012 में मु...