नई दिल्ली, मार्च 13 -- भगवान विष्णु को एकादशी व्रत बहुत प्रिय है। एक महीने में दो एकादशी आती है। एक शुक्ल पक्ष और एक कृष्ण पक्ष की। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो व्रत के महात्म्य को पढ़ता या सुनता है, उस के सभी पापों की क्षमा मिल जाती है। इस व्रत में सबसे पहले व्रत का संकल्प लिया जाता है। संकल्प के बाद भगवान विष्णु की षोडशोपचार सहित श्री पूजा करनी चाहिए। इस व्रत के नियम दशमी से ही शुरू हो जाते हैं। दशमी तिथि को रात को भोजन नहीं करते हैं और शुद्धता का खास ध्यान रखते हैं। भगवान श्रीहरि का ध्यान लगाना चाहिए। पापमोचनी एकादशी व्रत में भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप में पूजा जाता है। पूरे दिन एकादशी का व्रत रखें और रात को श्रीहरि का जागरण करें। एकादशी में भगवान ‌विष्णु के रात्रि जागरण का ...