नई दिल्ली, सितम्बर 6 -- कोलकाता की गलियों में एक बार फिर इतिहास और राजनीति का पुराना रिश्ता सुर्खियों में है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में अब भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद के जीवन और योगदान से जुड़े अध्याय शामिल किए जाएंगे। इस घोषणा के बाद से ही लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर स्वामी प्रणवानंद कौन थे और उनका बंगाल के इतिहास में इतना बड़ा स्थान क्यों माना जाता है।कौन थे स्वामी प्रणवानंद स्वामी प्रणवानंद का जन्म 29 जनवरी 1896 को अविभाजित बंगाल के फरीदपुर जिले (अब बांग्लादेश में) के बाजितपुर गांव में हुआ था। बचपन का नाम बिनोद था। उनके पिता विष्णुचरण दास और माता शारदा देवी शिवभ...