नई दिल्ली, मार्च 4 -- 19 जिलों में हुई पुलिस की समन्वित कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये संगठित गिरोह काम कैसे करते थे? शुरुआती जांच और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी बताती है कि यह नेटवर्क पारंपरिक अपराध से कहीं ज्यादा आधुनिक और संरचित तरीके से संचालित हो रहा था।बाहर बैठा 'कमांड', अंदर एक्टिव 'फील्ड यूनिट' जांच में सामने आया है कि कई गैंग लीडर प्रदेश से बाहर या विदेश में बैठकर नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे। स्थानीय स्तर पर 3 से 5 लोगों की छोटी-छोटी टीमें बनाई गई थीं, जिन्हें "टास्क बेस्ड काम" दिया जाता था। इनका सीधा संपर्क सरगना से नहीं, बल्कि मिडिल-लेवल हैंडलर से होता था। यह भी पढ़ें- ईरान मिसाइल अटैक का शिकार हुआ राजस्थान का युवक,जॉइनिंग के 40 दिन बाद ही मौत यह भी पढ़ें- डबल पावर में राजस्थान के IAS गौरव अग्रवाल, जोधपुर प...