नई दिल्ली, जून 6 -- अपनी आभासी दुनिया से निकलकर दो करोड़ फॉलोअर्स वाली 'कॉक्रोच जनता पार्टी' का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन खास प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहा। इससे वे क्रांतिकारी मित्र यकीनन निराश हुए होंगे, जिन्होंने सोशल मीडिया की जोशीली पंक्तियों से अपनी आंखों के सामने फ्रांसीसी राज्यक्रांति के पुनर्अवतरण के सपने पाल लिए थे। मैं यहां प्रदर्शनकारियों की नीयत पर सवाल नहीं उठा रहा और न यह कह रहा हूं कि जो लोग जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए, उनमें से सभी गलत थे। वे चाहते थे, उन्हें विरोध-प्रदर्शन का मौका मिले, सरकार ने उन्हें निराश नहीं किया। यहां हमें प्रदर्शनों और राजनीतिक अभियानों के अंतर को समझना होगा। उदाहरण तो दर्जनों हैं, लेकिन अतीत के बियाबान में भटके बिना मैं आपको अन्ना आंदोलन के लम्हों में वापस ले जाना चाहता हूं। महाराष्ट्र के गांवों में कई सफल...